Friday, December 7, 2012

कोई बात तो है

आज वो खोये खोये हैं
लगता है ,कोई बात तो है ।
कभी हँसते कभी रोये हैं
लगता है कोई बात तो है ।

कभी दिन ढले पास तो आये ,
और भोर हुए चले जाना ।
कभी दूर कभी पास से हैं ,
जैसे कोई बात तो है ।

कभी वो गुमशुम से बैठे हैं
और कभी मुस्काते हैं ,
पूछूँ तो बताते नहीं हैं
लेकिन कोई बात तो है ।

रोज रात को बैठ सिरहाने
कभी वो मीठी बात करें ,
और कभी फिर सन्नाटा सा
जैसे कोई बात तो है ।

आज फिर जब मैंने पूछा -
"क्या है ? कोई बात तो है ?"
फिर भी नहीं कहा कुछ उसने,
लेकिन कोई बात तो है ।

कई बार था मैंने पूछा ,
आखिर कोई बात तो है ।

आज सुबह थे वो गुमशुम से
पूछा तो बोले - "कुछ नहीं है ।"
लेकिन मैं तो जान चुकी थी -
आखिर कोई बात जो है ।

No comments:

Post a Comment

सुधि एवं विज्ञ पाठकगण अपने सुझाव अवश्य दें । आपके सुझाव व कमेंट्स बहुत कीमती हैं। किन्तु बिना पोस्ट पढ़े कमेंट न दें । कुछ रचनाएँ साभार प्रकाशित की गई हैं (जहाँ कथित हैं), तथा इनमें कोई स्वार्थ निहित नहीं है ।